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अंकिता भंडारी प्रकरण: न्याय की चौखट पर धामी सरकार का ‘जीरो टॉलरेंस’ प्रहार, जानें कैसे शिकंजे में आए गुनहगार

मजबूत चार्जशीट के दम पर आरोपियों को उम्रकैद की सजा

देहरादून: देवभूमि की बेटी अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की कानूनी और सामाजिक लड़ाई में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली उत्तराखंड सरकार ने पहले दिन से ही सख्त प्रशासनिक जवाबदेही और मानवीय संवेदनशीलता का परिचय दिया है। इस संवेदनशील हत्याकांड के सामने आने के बाद से लेकर अदालत से सजा मिलने तक, राज्य सरकार ने बिना किसी दबाव के अपराधियों के खिलाफ चौतरफा और निर्णायक घेराबंदी सुनिश्चित की।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का संदेश शुरुआत से ही अत्यंत स्पष्ट रहा है—राज्य में महिलाओं के विरुद्ध अपराध करने वालों के लिए कोई जगह नहीं है, और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
1. त्वरित एक्शन: 24 घंटे में सलाखों के पीछे पहुंचे आरोपी
अंकिता के लापता होने और हत्या की बात सामने आते ही मुख्यमंत्री ने पुलिस और प्रशासन को बिना किसी ढिलाई के कड़े निर्देश जारी किए। परिणाम यह रहा कि राज्य पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए घटना के 24 घंटे के भीतर मुख्य आरोपियों को दबोचकर जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया। रसूख और प्रभाव की परवाह किए बिना अपराधियों पर तुरंत कानूनी शिकंजा कसा गया।
2. अभेद्य अभियोजन: SIT का गठन और दोषियों को ‘आजीवन कारावास’
मामले की तह तक जाने और हर बारीक सबूत को जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री के निर्देश पर तत्काल एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया।
  • पुख्ता चार्जशीट: एसआईटी ने वैज्ञानिक और फॉरेंसिक साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और तकनीकी सबूतों के आधार पर अदालत में एक बेहद मजबूत आरोपपत्र दाखिल किया।
  • गैंगस्टर एक्ट और उम्रकैद: सरकार के बेहद प्रभावी विधिक अभियोजन का ही नतीजा था कि कोटद्वार की अदालत ने मुख्य दोषियों (पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता) को उम्रकैद (आजीवन कारावास) और भारी जुर्माने की कड़ी सजा सुनाई।
  • हाईकोर्ट में भी शिकंजा मजबूत: अपराधियों के खिलाफ सरकार की पैरवी इतनी अभेद्य रही कि उच्च न्यायालय (High Court) से भी दोषियों की जमानत याचिकाओं को लगातार खारिज होना पड़ा।
3. परिजनों की मांग का सम्मान: सरकारी वकील बदले, CBI जांच की प्रक्रिया बढ़ी
धामी सरकार ने इस पूरी विधिक लड़ाई में पीड़ित माता-पिता के भरोसे को सबसे ऊपर रखा। जब भी परिजनों ने अपनी कोई आशंका जताई, सरकार ने उस पर संवेदनशीलता से कदम उठाए:
  • वकीलों में बदलाव: पीड़ित परिवार की मांग और उनकी मानसिक संतुष्टि के लिए केस की पैरवी कर रहे सरकारी अधिवक्ताओं को तुरंत बदल दिया गया।
  • CBI जांच पर त्वरित फैसला: अंकिता के माता-पिता की इच्छा का पूरा सम्मान करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले की गहराई से जांच के लिए सीबीआई (CBI) जांच की प्रक्रिया को भी तुरंत आगे बढ़ाया, ताकि न्याय की पारदर्शिता पर कोई सवाल न रहे।
4. आर्थिक संबल और रोजगार की जिम्मेदारी
दुख की इस घड़ी में पीड़ित परिवार को अकेले छोड़ने के बजाय धामी सरकार ने उन्हें सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा देने की बड़ी जिम्मेदारी निभाई:
  • सरकार की ओर से शोकाकुल परिवार को तुरंत ₹25 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान की गई।
  • इसके साथ ही परिवार के सदस्यों को जीवन की मुख्यधारा से जोड़े रखने और आजीविका की सुरक्षा के लिए रोजगार उपलब्ध कराने हेतु ठोस और प्रभावी कदम उठाए गए।
महिला सुरक्षा पर राज्य सरकार का कड़ा संदेश
अंकिता भंडारी प्रकरण में धामी सरकार द्वारा उठाए गए ये कड़े और संवेदनशील कदम यह साबित करते हैं कि उत्तराखंड में कानून व्यवस्था किसी भी अपराधी के रसूख से बड़ी है। त्वरित गिरफ्तारी, मजबूत फॉरेंसिक जांच, प्रभावी कानूनी पैरवी और पीड़ित परिवार को हर मोड़ पर दिया गया प्रशासनिक साथ—यह साफ करता है कि सूबे में महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार पूरी ताकत से मुस्तैद है।

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