लखनऊ में सनसनीखेज डिजिटल अरेस्ट: खुद को ATS-CBI अफसर बता रिटायर्ड FCI कर्मी से 42 लाख रुपये ठगे, पुलवामा केस का दिखाया डर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से ‘डिजिटल अरेस्ट’ (Digital Arrest) की एक बेहद चौंकाने वाली और डराने वाली घटना सामने आई है। यहाँ साइबर ठगों ने खुद को देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसियों (ATS/NIA/CBI) का अधिकारी बताकर फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) के एक 70 वर्षीय बुजुर्ग रिटायर्ड कर्मचारी और उनकी पत्नी को अपने जाल में फंसाया। ठगों ने बुजुर्ग दंपत्ति को पुलवामा आतंकी हमले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी दी और डरा-धमकाकर 42.09 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए।

ऐसे बुना गया डिजिटल अरेस्ट का जालपीड़ित बुजुर्ग कर्मचारी (70) और उनकी पत्नी को अचानक एक अनजान नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को कानून लागू करने वाली एजेंसी का बड़ा अधिकारी बताया। उसने बुजुर्ग को डराते हुए कहा कि उनके बैंक खाते का इस्तेमाल पुलवामा आतंकी हमले की फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया गया है। इसके बाद ठगों ने स्काइप (Skype) या वीडियो कॉल के जरिए बुजुर्ग दंपत्ति को उनके ही घर में ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लिया।
पुलवामा केस और जेल का डर दिखाकर ऐंठे 42.09 लाख
शातिर ठगों ने वीडियो कॉल पर फर्जी अदालती आदेश, पुलिस की वर्दी और नकली सेटअप दिखाकर ऐसा माहौल बनाया कि बुजुर्ग दंपत्ति बुरी तरह डर गए। ठगों ने उनसे कहा कि अगर वे जेल जाने और बदनामी से बचना चाहते हैं, तो उन्हें अपने बैंक खातों की पूरी रकम ‘वेरिफिकेशन’ के लिए सरकार के सुरक्षित खाते में ट्रांसफर करनी होगी।ठगों के खौफ और दबाव में आकर बुजुर्ग दंपत्ति ने अपने जीवनभर की गाढ़ी कमाई के 42.09 लाख रुपये ठगों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए। रकम ट्रांसफर होने के बाद जब फोन कट गया और ठगों से संपर्क टूट गया, तब दंपत्ति को अपने साथ हुई इस बड़ी धोखाधड़ी का अहसास हुआ।
पुलिस और साइबर सेल जांच में जुटी
पीड़ित की शिकायत पर लखनऊ पुलिस और साइबर क्राइम सेल ने तत्काल मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस उन बैंक खातों की डिटेल्स खंगाल रही है जिनमें पैसे ट्रांसफर किए गए थे। साथ ही जिन नंबरों से कॉल आई थी, उन्हें सर्विलांस पर ले लिया गया है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपियों को ट्रेस कर लिया जाएगा।
सावधान रहें: साइबर सेल की जरूरी गाइडलाइन
इस बड़ी ठगी के बाद लखनऊ साइबर सेल ने आम जनता, विशेषकर बुजुर्गों के लिए एक बार फिर चेतावनी जारी की है:कोई डिजिटल अरेस्ट नहीं होता: भारत में सीबीआई, एनआईए, एटीएस, पुलिस या कस्टम्स जैसी कोई भी एजेंसी वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार (Digital Arrest) नहीं करती और न ही घर में कैद रहने को कहती है।
पैसे ट्रांसफर न करें: कोई भी सरकारी जांच एजेंसी फोन पर पैसों की मांग या किसी ‘सुरक्षित खाते’ में पैसे ट्रांसफर करने की बात नहीं कहती।डरे नहीं, तुरंत कॉल काटें: यदि कोई आपको किसी बड़े केस का नाम लेकर डराता है, तो तुरंत फोन काटें और अपने परिवार या स्थानीय पुलिस को सूचित करें।
कहाँ करें शिकायत: साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।




