विजिलेंस ने ऑर्थोपेडिक्स सर्जन को किया अरेस्ट, दिव्यांगता सर्टिफिकेट बनाने के नाम पर मांगी थी रिश्वत

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले से बड़ी खबर सामने आई है. रुद्रप्रयाग जिला हॉस्पिटल से विजिलेंस की टीम ने ऑर्थोपेडिक्स सर्जन को पांच हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है. पीड़ित ने 1064 पर शिकायत की थी, जिसके बाद विजिलेंस की टीम ने शिकायत की पुष्टि की. शिकायत की पुष्टि होने के बाद विजिलेंस ने आरोपी डॉक्टर को पकड़ने के लिए अपना जाल बिछाया और पांच हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया.
जानकारी के अनुसार विजिलेंस विभाग की टीम के टोल फ्री नंबर 1064 पर शिकायत प्राप्त हुई थी. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि विकलांगता प्रमाण पत्र बनवाने के एवज में जिला अस्पताल में तैनात ऑर्थोपेडिक्स सर्जन डॉ. अंकुर ठाकुर उससे पांच हजार रुपए की रिश्वत मांग रहा है. शिकायत मिलने के बाद सतर्कता विभाग (विजिलेंस) ने मामले की गोपनीय जांच कराई. जांच में शिकायत प्रथम दृष्टया सही पाई गई.
इसके बाद पुलिस अधीक्षक सतर्कता सेक्टर देहरादून के निर्देश पर ट्रैप टीम का गठन किया गया. गठित टीम ने आरोपी डॉक्टर को पकड़ने के लिए अपना जाल बिछाया. इसके बाद मंगलवार 29 सितंबर को विजिलेंस विभाग की टीम ने जिला अस्पताल रुद्रप्रयाग में नियोजित तरीके से ट्रैप कार्रवाई की.
विजिलेंस विभाग के अनुसार शिकायतकर्ता ने जैसे ही डॉक्टर को रिश्वत के पांच हजार रुपए दिए, तभी विजिलेंस की टीम ने आरोपी डॉक्टर डॉ. अंकुर ठाकुर को रंगे हाथ दबोच लिया. विजिलेंस विभाग की इस कार्रवाई से हॉस्पिटल में हड़कंप मच गया.
विजिलेंस विभाग ने आरोपी डॉक्टर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अभियोग पंजीकृत कर वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है. ट्रैप कार्रवाई के बाद मामले की आगे की जांच की जा रही है. विजिलेंस विभाग ने आमजन से अपील की है कि यदि किसी भी विभाग का अधिकारी-कर्मचारी रिश्वत मांगता है तो उसकी शिकायत 1064 पर करें.



